पुराने भोपाल का दर्द: तंग गलियों में दम तोड़ता यातायात, प्रशासन की बेरुख़ी पर सवाल*
Anam Ibrahim
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*BBC OF INDIA. COM*
सब्र तोड़ती ख़बर की रफ्तार
Mukesh singh
Azam
Zafeer y
*Bhopal/Mp:* भोपाल के पुराने शहर की तंग गलियों और सड़कों पर रोज़मर्रा का ट्रैफ़िक इस कदर हावी हो चुका है कि हालात बद से बदतर हो गए हैं। वाहनों की बढ़ती संख्या, सड़कों के किनारे खड़े गाड़ियां, और प्रशासन की लापरवाही ने यहां यातायात व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। एम्बुलेंस की चीखें जाम में दम तोड़ रही हैं, लेकिन प्रशासन कागज़ी कार्रवाई से आगे नहीं बढ़ रहा।
*पुराने शहर की उपेक्षा, नए शहर का पक्षपात*
नगर निगम और यातायात पुलिस द्वारा किए जाने वाले दावों की हक़ीक़त केवल नए भोपाल तक सीमित है। नए शहर में मामूली अतिक्रमण पर कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपाने वाला प्रशासन पुराने शहर को जैसे भूल ही गया है। टीटी नगर दशहरा मैदान के आसपास 34 वाहनों पर चालान और 14 को क्रेन से हटाए जाने की प्रेस नोट जारी कर दी गई, मगर पुराने शहर की तंग गलियों में खड़े वाहनों और अव्यवस्थित यातायात की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
*जाम में फंसती ज़िंदगियां, प्रशासन की खामोशी*
आलम यह है कि पुरानी भोपाल की गलियों में हर दिन लगने वाले जाम में आम जनता से लेकर एम्बुलेंस तक फंस जाती है। मरीजों की जान पर बन आती है, लेकिन प्रशासन को शायद नए शहर की चौड़ी सड़कों से फुर्सत ही नहीं।
*निगम और पुलिस पर गंभीर सवाल*
प्रेस नोट के मुताबिक, दशहरा मैदान के आसपास अस्थाई अतिक्रमण हटाने का दावा किया गया है, लेकिन सवाल यह है कि पुराने भोपाल की तंग गलियों और सड़क किनारे बेतरतीब खड़े वाहनों पर कब कार्रवाई होगी? क्या पुराने शहर को हमेशा इस सौतेलेपन का शिकार बनना पड़ेगा?
*आवाम का सवाल: कब बदलेगी तस्वीर?*
क्या भोपाल का प्रशासन पुराने शहर के निवासियों को भी आधुनिक और व्यवस्थित यातायात का हकदार समझेगा? या नए शहर की चकाचौंध में दबे इस हिस्से को हमेशा उपेक्षा झेलनी पड़ेगी?
यातायात पुलिस और नगर निगम को चाहिए कि वह पुराने भोपाल की समस्याओं पर ध्यान दे, ताकि यहां की गलियां भी राहत की सांस ले सकें। वरना वह दिन दूर नहीं जब पुराने शहर की धड़कनें पूरी तरह से थम जाएंगी।
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