भाजपा ने चुनावी दस्तक से पहले अपने ज़िला दफ़्तरों को ‘सियासी चौकियाँ’ बनाने की कवायद तेज़ की!!!
भाजपा ने चुनावी दस्तक से पहले अपने ज़िला दफ़्तरों को ‘सियासी चौकियाँ’ बनाने की कवायद तेज़ की!!!
Anam Ibrahim
Journalist_007
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चुनाव से पहले भाजपा अपने ‘सियासी क़िलों’ की दरारें भरने के पुख्ता इंतेज़ाम मे जुटी!
भाजपा ने ज़िला दफ़्तरों के निर्माण और मरम्मत अभियान को दी रफ़्तार!!
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल का सख़्त संदेश निर्माणाधीन कार्यालय तय समय सीमा में हों पूरे, पुराने दफ़्तर भी संगठन और कार्यकर्ताओं की ज़रूरतों के मुताबिक नए ढंग से सँवारे जाएँ
संगठन की ‘मरम्मत मुहिम’ नए बीजेपी के कार्यालय तय वक़्त में खड़े करने का हुक्म, पुराने दफ़्तरों को भी फिर से रुतबा, रौनक़ और कार्यकर्ताओं की हलचल से आबाद करने की तैयारी!!!
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ख़बर BJP दफ़्तर से..........
Bhopal/Mp: भोपाल इस दौरान-ए-सियासत मे चुनाव सिर्फ़ मंचों, नारों और रैलियों से नहीं जीते जाते, सियासत की असली साँस उन दफ़्तरों में चलती है जहाँ कार्यकर्ता सुबह की चाय के साथ अगली लड़ाई का मिज़ाज पढ़ते हैं। शायद यही वजह है कि मध्यप्रदेश भाजपा ने अब अपने ज़िला कार्यालयों की तरफ़ नज़रें मोड़ ली हैं।
मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई भवन निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण समिति की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने साफ़ कहा कि स्थापना दिवस पर जिन ज़िला कार्यालयों का भूमिपूजन हुआ, उनका निर्माण तय समय-सीमा में मुकम्मल किया जाए। साथ ही पुराने ज़िला दफ़्तरों को भी इस तरह संवारा जाए कि वे कार्यकर्ताओं के लिए महज़ चारदीवारी नहीं, बल्कि संगठन की जीवित धड़कन महसूस हों।
बैठक में पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता को भवन निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण समिति का संयोजक बनाया गया।
समिति में शैलेन्द्र बरूआ, राहुल कोठारी, सीए अखिलेश जैन, जीतू जिराती और आर्किटेक्ट गौरव गर्ग को शामिल कर संभागवार जिम्मेदारियाँ भी सौंप दी गईं।
रीवा से इंदौर और भोपाल से ग्वालियर तक अब नेता सिर्फ़ राजनीति नहीं देखेंगे, बल्कि दफ़्तरों की नींव, दीवार, व्यवस्थाएँ और संगठन की ज़मीनी हरारत भी परखेंगे। भाजपा का यह कदम साफ़ इशारा है कि चुनावी मौसम से पहले पार्टी अपने संगठनात्मक ढाँचे को नीचे से ऊपर तक दुरुस्त, दुरुह और दमदार बनाने में जुट चुकी है।
सियासत में अक्सर इमारतें भी बयान देती हैं। और इस वक़्त मध्यप्रदेश भाजपा अपने दफ़्तरों की मरम्मत से शायद यही कहना चाहती है *संगठन अभी थका नहीं है, बस अगली लड़ाई से पहले अपने कंधे सीधा कर रहा है!*
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