जबलपुर पुलिस की तमाम कोशिशें नाकाम, कॉम्बिंग गश्त हुई बदनाम !

जबलपुर पुलिस की तमाम कोशिशें नाकाम, कॉम्बिंग गश्त हुई बदनाम !

Anam Ibrahim 

7771851163

*BBC OF INDIA. COM*

ख़बर एक सवाल अनेक.।....

Azam lala 

Zafeer khan 

पंकज, अलीम 

फराज़, रोहित

*जबलपुर/मप्र:* जबलपुर: चाहे कॉम्बिंग गश्त हो, चेकिंग पॉइंट या पुलिस की कड़ी निगरानी, शहर में अपराध का ग्राफ थमने का नाम नहीं ले रहा। पुलिस अधीक्षक जबलपुर सम्पत उपाध्याय के आदेश पर हाल ही में शहर और ग्रामीण इलाकों में पुलिस ने रातभर कॉम्बिंग गश्त चलाई, लेकिन सवाल ये है कि आखिर क्या हासिल हुआ?

*बड़ा दावा, पर नतीजे सवालों के घेरे में*

पुलिस के मुताबिक, गश्त के दौरान 307 वारंट तामील किए गए, कुछ पुराने फरार आरोपियों को पकड़ा गया और गांजा, शराब और डीजल के अवैध कारोबारियों पर कार्रवाई हुई। लेकिन असलियत में यह सब आंकड़ों का खेल लगता है। शहर में अपराधियों का दुस्साहस जस का तस है। गुंडे और असामाजिक तत्व पुलिस की आंखों में धूल झोंककर खुलेआम घूम रहे हैं।

*23 किलो गांजा और शराब बरामद, लेकिन क्या ये काफी है?*

गांजा के 23 किलो और शराब की कुछ पाव बोतलों की बरामदगी को पुलिस बड़ी सफलता बता रही है, लेकिन ये तो महज ऊंट के मुंह में जीरा है। शहर की गलियों में अभी भी मादक पदार्थों का कारोबार जोरों पर है। पुलिस चाहे जितने दावे कर ले, सच्चाई यह है कि ड्रग माफिया के जाल से शहर पूरी तरह जकड़ा हुआ है।

*क्या वाकई बदलेगी तस्वीर?*

सैकड़ों पुलिसकर्मियों की टीम, रातभर की गश्त और चेकिंग अभियान, लेकिन न तो अपराधियों का हौसला टूटा और न ही शहर के लोग सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सवाल ये है कि क्या पुलिस के ये तमाम प्रयास सिर्फ दिखावा हैं?

शहरवासी असुरक्षित, पुलिस के प्रयास सवालों के घेरे में

कॉम्बिंग गश्त के दौरान कुछ संदिग्धों से पूछताछ और पुराने वारंटों की तामील के बावजूद, जबलपुर के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और गलियों में अपराधियों की गतिविधियां जारी हैं। शहर में बढ़ते अपराध और पुलिस के कमजोर परिणामों ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी कौन लेगा?

*आम जनता में रोष*

शहर के लोगों का कहना है कि पुलिस के इन अभियानों का असल असर सड़क पर नजर नहीं आ रहा। गुंडे-बदमाशों का डर और मादक पदार्थों की आसान उपलब्धता ये दिखाती है कि जबलपुर पुलिस की रणनीति में कहीं न कहीं बड़ी खामियां हैं।

क्या पुलिस का अगला कदम जनता की सुरक्षा को पुख्ता करेगा या ये अभियान महज कागजी आंकड़ों का हिस्सा बनकर रह जाएगा? ये देखने वाली बात होगी।