कांग्रेस की सियासी नौटंकी! बेड़ियां हाथ में, बेबसी दिमाग में!

कांग्रेस की सियासी नौटंकी! बेड़ियां हाथ में, बेबसी दिमाग में!

Anam Ibrahim 

Journalist 

7771851163

"खुद का जहाज डूब रहा, और बचाने चले ज़नाब हिंदुस्तान !"

भोपाल, 7 फरवरी 2025

BBC-OF-INDIA

*Bhopal/Mp/USA:* अबे ओ भइया, कांग्रेसियों की नई नौटंकी देखी? हाथों में बेड़ियां पहनकर सड़क पर खड़े हो गए, जैसे अभी-अभी जेल से छूटे हों! पर असली सवाल ये है—ये बेड़ियां सिर्फ हाथों में हैं या दिमाग पर भी चढ़ गई हैं? जनता का तो हाल बेहाल है, लेकिन इन्हें अमेरिका में हुए "महान अन्याय" पर रोना आ रहा है! खुद की सियासी ज़मीन खिसक गई, पार्टी के अंदर ही नेता पटवारी को हजम नहीं कर पा रहे, और ये देश बचाने चले हैं!

"हथकड़ी स्टंट या कांग्रेस की नई पॉलिटिकल वेब सीरीज़?"

भोपाल में हुए इस "सड़क छाप ड्रामे" में कांग्रेसियों ने अमेरिका और मोदी सरकार पर गुस्सा निकाला। हथकड़ियां बांध लीं, तख्तियां उठा लीं, और लगे नारे लगाने। जनता पूछ रही है—"भाई, ये स्क्रिप्ट खुद लिखी है या हॉलीवुड से कॉपी कर लाए?" देश के असली मुद्दों पर कुछ बोलने की औकात नहीं, मगर विदेशों के मुद्दों पर तड़प ऐसे रहे हैं जैसे इनके बाप-दादा वहीं के थे!

"कांग्रेस का नया करियर ऑप्शन: एक्टिंग क्लास!"

अबे यार, अगर राजनीति नहीं चल रही तो ढंग की एक्टिंग क्लास खोल लो! सड़क पर प्रदर्शन कम, और नाटक ज्यादा दिख रहा था। कांग्रेस वाले जिस तरह से हथकड़ियां पहनकर पोज़ दे रहे थे, लग रहा था जैसे किसी सस्ते थ्रिलर का पोस्टर लॉन्च कर रहे हों! जनता सोच रही थी—"भाई, सरकार गिराने आए हो या टिकटॉक वीडियो बनाने?"

"इमोशनल ड्रामा से वोट नहीं मिलते!"

कांग्रेस की हालत ऐसी हो गई है कि मुद्दों की जगह इमोशनल ड्रामा पर जी रही है। ये लोग जनता की बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार पर दो लफ्ज़ नहीं बोलेंगे, मगर अमेरिका में जो हुआ, उस पर मातम ज़रूर मनाएंगे! खुद इनकी पार्टी के 50% लोग जीतू पटवारी को अपना नेता नहीं मानते, मगर ये देश को न्याय दिलाने चले हैं!

"कांग्रेस की स्टंटबाज़ी काf असली मकसद क्या?"

देखो जी, बात सीधी है—ये हथकड़ी स्टंट जनता के लिए नहीं था, बल्कि अपने ही कार्यकर्ताओं को "एक्टिव" दिखाने का नाटक था। अब जब विधानसभा चुनावों में धूल चाट चुके हैं, तो सड़क पर कुछ तमाशा करना जरूरी है, वरना कोई पूछेगा भी नहीं!

"जनता का जवाब: ड्रामा छोड़, असल मुद्दों पर बात कर!"

देश का युवा ये तमाशे देखकर यही सोच रहा है—"कांग्रेस को अब राजनीति से संन्यास लेकर थिएटर ग्रुप बना लेना चाहिए!" जो पार्टी खुद के घर में आग बुझा नहीं पा रही, वो देश को जलते देख आंसू बहा रही है। भइया, पहले अपनी गली संभाल लो, फिर दुनिया बदलने की सोचो!

(Disclaimer: इस खबर में जो भी कहा गया है, वो कांग्रेस की हालत देखकर लिखा गया है। किसी को ज्यादा दर्द हुआ तो पार्टी ऑफिस में कॉम्प्लेन कर सकते हैं!)