RED FM का साइबर माइक: अब इंदौर पुलिस बताएगी, ठगी के सुर में कैसे सुराख किया जाए
Anam Ibrahim
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BBC OF INDIA. COM
न्यूज़ नेटवर्क
रेड एफएम के स्टूडियो
*इंदौर/मप्र:* इंदौर की क्राइम ब्रांच ने रेड एफएम के साथ हाथ मिलाया है, लेकिन इस बार गानों की धुन पर डांस नहीं, बल्कि ठगी के नए-नवेले ट्रेंड्स पर ज्ञान मिलेगा। "साइबर माइक" नामक इस अभियान का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि ऑनलाइन दुनिया में "चुपचाप क्लिक करना" आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।
शाम 6:30 बजे से 7:00 बजे तक RJ Venu के साथ इंदौर पुलिस बताएगी, कैसे आपकी एक लापरवाही आपको कंगाल बना सकती है। लेकिन सवाल ये उठता है कि रेड एफएम के श्रोता, जो अक्सर "दिल खोल के बजा" वाले मूड में रहते हैं, क्या अब साइबर अपराधों के बारे में सुनकर दिमाग खोल पाएंगे?
*मज़ेदार मोड़:*
रेड एफएम के स्टूडियो में एडीशनल डीसीपी क्राइम श्री राजेश दंडोतिया ने RJ Venu के साथ मिलकर जब "साइबर माइक" की शुरुआत की, तो RJ Venu ने पूछा, "सर, क्या आपने कभी फेक कॉल पर ट्रोल करने का मज़ा लिया है?" जवाब में एडीशनल डीसीपी ने कहा, "हम तो उन्हें ट्रोल नहीं करते, सीधे ठिकाने लगाते हैं!"
*सचेत जनता या खौफज़दा जनता?*
इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि लोग सतर्क होंगे, लेकिन क्या साइबर अपराधियों के हाई-टेक ट्रिक्स के आगे ये जागरूकता वाकई टिक पाएगी? कहीं ऐसा न हो कि लोगों को ये रेडियो शो सुनने के बाद हर कॉल और लिंक को शक की निगाह से देखना शुरू कर दें।
*दिलचस्प आंकड़ा:*
इस अभियान की शुरुआत से पहले, पुलिस ने 348 वर्कशॉप्स में 50 कर्मचारियों को "ठगी के प्रकार" पढ़ाए, लेकिन क्या ये ज्ञान रेड एफएम की मस्तमौला ऑडियंस को आकर्षित कर पाएगा?
*"ठगों के खिलाफ संगीत का वार" या पुलिस का "PR स्टंट"?*
सवाल यह भी है कि क्या यह अभियान वाकई साइबर अपराध रोकने में मदद करेगा, या फिर यह सिर्फ पुलिस और रेड एफएम का एक और प्रचारक कदम है। क्या RJ Venu साइबर क्राइम की गंभीरता को अपनी मसालेदार आवाज़ में मज़ेदार बना पाएंगे, या जनता इसे सिर्फ एक नया "रेडियो ड्रामा" मानकर भुला देगी?
जो भी हो, इंदौर पुलिस का यह कदम यह तो साबित करता है कि ठगों को रोकने के लिए अब कानून की किताबों से ज्यादा रेडियो के माइक की जरूरत है। सुनिए "साइबर माइक", क्योंकि ठगी से बचना है तो सतर्क रहना है।
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