जबलपुर बेटा बना माँ का क़ातिल: माँ चीखती रही बेटा लोहे की रॉड बरसाता रहा!
जबलपुर बेटा बना माँ का क़ातिल: माँ चीखती रही बेटा लोहे की रॉड बरसाता रहा!
Anam Ibrahim
Journalist
7771851163
जिस कोख ने जना, उसी की साँसें लोहे के डंडे से कुचल दीं!
सिहोरा में बेटे ने माँ को पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट, खून से लथपथ बूढ़ी अम्मा रात भर इंसानियत को पुकारती रही और समाज सोता रहा!
सिहोरा में शक, गुस्से और वहशत ने रिश्तों का जनाज़ा निकाल दिया जिस माँ ने बेटे को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसी ने आख़िरी साँस उससे बचते-बचाते तोड़ी
BBC_OF_INDIA
पढ़िए....
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अख़बार की दुनियां मे बेबाक़ी का सबसे बड़ा कलेजा......
*Jabalpur/Mp:* सिहोरा की वह रात सिर्फ़ एक हत्या की रात नहीं थी, ये वह रात थी जब एक बेटे ने अपनी माँ की कोख को लहूलुहान कर दिया ।
जब एक बूढ़ी औरत की चीखें दीवारों से टकराती रही और इंसानियत चुपचाप सिर झुकाए खड़ी रही।
जी हां जबलपुर जिले के सिहोरा के गढ़िया मोहल्ला, वार्ड नंबर 07 में 26 मई की रात जो हुआ, वह किसी वहसी फ़ौजदारी दास्तान से कम नहीं।
64 वर्षीय गिराना बाई कोल एक बूढ़ी माँ..... जिसने अपने बच्चों को गरीबी, भूख और तकलीफ़ों के बीच बड़ा किया उसी माँ का सिर उसके अपने ही बेटे करन कोल ने लोहे के पंखे के स्टैंड से फोड़ दिया।
तकरीबन रात करीब डेढ़ बजे मोहल्ले का ख़ामोश सन्नाटा अचानक चीखों से भर गया । अफरातफ़री के इस आलम मे
पड़ोसी राजेश कोल की पत्नी दौड़ते हुए दशरथ कोल के घर पहुँची और काँपती आवाज़ में बोली
“उठो...... करन अम्मा को मार रहा है”
फिर क़्या था दशरथ अपनी पत्नी सुमन बाई के साथ भागकर माँ के कमरे में पहुँचा।
जो मंज़र सामने था, वह किसी भी बेटे की रूह फाड़ देने के लिए काफी था।
कमरे में बूढ़ी माँ गिराना बाई खून से लथपथ पड़ी थीं।
सिर फटा हुआ,पीठ पर वार के निशान दाहिना हाथ सूजा हुआ और सामने छोटा बेटा करन कोल लोहे के स्टैंड से वार पर वार किए जा रहा था।
जैसे ही करन ने अपने बड़े भाई को देखा, वह अंधेरे पहाड़ी रास्तों की तरफ भाग निकला।
पीछे छूट गई एक माँ..... जिसकी साँसें टूट रही थीं।
पूछताछ में बहू क्रांति कोल ने जो बताया, उसने इस वारदात को और भी दर्दनाक बना दिया।
उसके मुताबिक करन काम से लौटने के बाद पत्नी पर शक करने लगा था।
घर में गाली-गलौज, झूमा-झपटी और कलेजे को चीर देने वाला हंगामा शुरू हो गया।
तभी बूढ़ी माँ गिराना बाई बीच-बचाव करने आईं।
शायद हर माँ की तरह उन्हें लगा होगा कि उनका बेटा उनकी बात मान जाएगा।
लेकिन उस रात बेटा, बेटा नहीं रहा वह गुस्से, शक और वहशत का नंगा चेहरा बन चुका था।
बताया गया कि गिराना बाई खुद को छुड़ाकर अपने कमरे की तरफ भागीं, मगर पीछे मौत दौड़ रही थी।
करन लोहे के पंखे का स्टैंड हाथ में लेकर उनके पीछे भागा और सिर, पीठ और शरीर के कई हिस्सों पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।
घर की बहू क्रांति, खून रोकने के लिए जला हुआ कपड़ा बूढ़ी माँ के घावों में भरती रही।
सोचिए!!!
कैसा मंजर रहा होगा? वह
एक तरफ मरती हुई माँ. दूसरी तरफ उसका फरार बेटा और बीच में जलते कपड़ों की बू।
सुबह करीब छह बजे परिजन उन्हें ऑटो से शासकीय अस्पताल सिहोरा लेकर पहुँचे, मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
डॉक्टरों ने गिराना बाई को मृत घोषित कर दिया।
यह सिर्फ़ एक हत्या नहीं
यह उस समाज के चेहरे पर तमाचा है जो “माँ” शब्द पर भाषण तो देता है, मगर घरों में बूढ़ी माँएँ अपमान, मारपीट और तन्हाई में दम तोड़ रही हैं।
घटना की खबर मिलते ही पुलिस अधीक्षक जबलपुर सम्पत उपाध्याय के निर्देश पर एसडीओपी सिहोरा आदित्य सिंघारिया और एफएसएल अधिकारी डॉक्टर नीता जैन मौके पर पहुँचे। एफएसएल टीम की मौजूदगी में पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया तथा धारा 103(1) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सूर्यकांत शर्मा, एसडीओपी आदित्य सिंघारिया और थाना प्रभारी सिहोरा प्रतीक्षा मार्को के नेतृत्व में टीम गठित की गई।
पुलिस ने चंद घंटों के भीतर ग्राम गौरहा में दबिश देकर आरोपी करन कोल को अभिरक्षा में ले लिया।
इस कार्रवाई में उप निरीक्षक नन्हेलाल रजक, उप निरीक्षक विनोद बागरी, आरक्षक संदीप पाण्डे, देवराज, राजेश, आकाश, पुष्पेन्द्र धुर्वे और राजेश शिवनाथ की भूमिका सराहनीय रही।
मगर इस पूरी वारदात के बाद सिहोरा की हवा में अब भी एक सवाल तैर रहा है
अगर माँ भी अपने बेटे के हाथों महफूज़ नहीं
तो फिर इस समाज में आखिर सुरक्षित कौन है ?
अनम बहोत सी ख़बर ऐसी होती हैं की लिखने मे उंगलियां कांप जाती हैं खैर....
मगर सवाल अब भी वहीं खड़ा है
क्या सचमुच हम एक सभ्य समाज में जी रहे हैं?
जहाँ माँ की झुर्रियों में दुआएँ नहीं, मौत लिखी जा रही है
जहाँ बेटों के हाथों में रोटी नहीं, लोहे के डंडे हैं
और जहाँ बूढ़ी माँएँ अब बेटों से नहीं, उनकी परछाइयों से डरती हैं।
admin