मंदसौर मप्र में 37 लाख की ‘7 मिनट वाली चोरी’ का पर्दाफाश : पकड़ी गई ‘लच्छु गैंग’!!

मंदसौर मप्र में 37 लाख की ‘7 मिनट वाली चोरी’ का पर्दाफाश : पकड़ी गई ‘लच्छु गैंग’!!

मंदसौर मप्र में 37 लाख की ‘7 मिनट वाली चोरी’ का पर्दाफाश : पकड़ी गई ‘लच्छु गैंग’!!

Anam Ibrahim 

Journalist_007

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ख़बर PHQ से...........

रात की पसलियों में घुसे ‘लच्छु गैंग’: ने सिर्फ अलमारियाँ नहीं तोड़ीं इस शहर की पड़ोसदारी, के भरोसे और जागती इंसानियत का जनाज़ा भी निकाल दिया!!

ग्रील कटने की आवाज़ आती रही! इधर शहर समाज की आत्माओ के कानो मे रुई ठुँसता रहा!!!

ये सिर्फ चोरी नहीं थी हुजूर ये उस समाज के गाल पर मारा गया जूता था, जहाँ पड़ोसी की दीवार टूटती है और लोग रज़ाई में मुँह छुपाकर कहते हैं..... हमें क्या?

         BBC_OF_INDIA 

         जनसम्पर्क Life 

अख़बार की दुनियां मे बेबाक़ी का सबसे बड़ा कलेजा.......

ताले लटकते रहे, मोहल्ले खर्राटे भरते रहे! और अपराध दस्ताने पहनकर अलमारियों से औरतों की चूड़ियाँ, बूढ़ों की जमापूंजी और बच्चों का भविष्य समेटता रहा। मंदसौर में पकड़े गए चार चेहरे चोर कम, इस सोते हुए समाज के मुँह पर पोती गई कालिख ज़्यादा हैं। 

कसम गद्दारन की ....

मंदसौर से पकड़े गए ये चार बदमाश सिर्फ अपराधी नहीं, उस बीमार दौर के पोस्टर हैं जहाँ मेहनत भूखी मरती है और शॉर्टकट इलेक्ट्रॉनिक कटर लेकर रात में निकल पड़ता है। ग्यारह राज्यों में घूमती यह गैंग दरअसल हमारे सुस्त समाज की खुली हुई ज़िप थी।

Bhopal/Mp/मंदसौर/मप्र:

सात मिनट का धर्मयुद्ध : ग्रील कटती रही, शहर सोता रहा और ‘लच्छु गैंग’ रात की पसलियों में हाथ डालकर जेवर निकालती रही

दरअसल मंदसौर में पकड़े गए चार चेहरे ख़ालिश चोर ही नहीं थे ये उस मुल्क की खुली खिड़कियाँ थे, जहाँ ताले अब नींद में नहीं, डर में बंद होते हैं। पुलिस ने 37 लाख का माल बरामद किया है, मगर सवाल अब भी गली के अंधेरे में खड़ा है आख़िर सात मिनट में घर लुट जाते हैं और मोहल्ले को खाँसी तक नहीं आती?

भोपाल PHQ से ज़ारी चोरी की वारदात की इस प्रेसनोट से “लच्छु गैंग” का नाम अपराध की दुनिया में वैसे फैल गया, जैसे सड़े हुए कमरे में मिट्टी का तेल।

 अनम ख़बर लिखने के पहले नाम सुनकर लगता है कोई देहाती नौटंकी मंडली होगी मगर साहब, ये वो कलाकार थे जो बंद घरों की साँस सुन लेते थे।

जहाँ आदमी नौकरी पर गया! जहाँ औरत मायके गई!! जहाँ बूढ़ा अस्पताल में पड़ा था!!! वहाँ ये लोग रात की दीवारों पर ऐसे चढ़ते थे जैसे भूख आदमी की रोटी पर चढ़ती है।

मध्यप्रदेश पुलिस ने मंदसौर के नाहरगढ़ इलाके से इस अंतर्राज्यीय गिरोह के चार सदस्यों को दबोचा है। पुलिस के मुताबिक ये लोग पंजाब से लेकर केरल तक, दिल्ली से असम तक, ग्यारह राज्यों में चोरी और डकैती की वारदातों का काला हस्ताक्षर छोड़ चुके हैं।

कहते हैं, ये लोग सिर्फ सात मिनट लेते थे।

सात मिनट!

इतने वक़्त में तो आदमी चाय में चीनी ढूँढता रह जाता है, और उधर ये लोग घर की ग्रील काटकर अलमारी का सिंदूर तक समेट लेते थे।

इनके पास बंदूक से ज्यादा भरोसा “इलेक्ट्रॉनिक कटर” पर था।

चेहरों पर मास्क, हाथों में ग्लब्स, जेब में पेचकस और दिल में शायद वो खालीपन, जो मेहनत से भर नहीं पाया।

अपराध हमेशा पेट से पैदा नहीं होता साहब कभी-कभी वह लालच की उस कोख से जन्म लेता है, जहाँ आदमी को मेहनत छोटी और शॉर्टकट मर्दानगी लगने लगता है।

गिरफ्तार आरोपियों में गणेश उर्फ गणपत, कैलाश उर्फ बिशन, छोटू वसुनिया और दिनेश उर्फ महेश शामिल हैं।

उम्र देखिए कोई 23 का, कोई 27 का।

यानी वो उम्र, जहाँ लड़के सपनों के पीछे भागते हैं मगर ये लोग दूसरों की अलमारी के पीछे भाग रहे थे।v

इनके कब्जे से करीब 25 लाख के सोने-चाँदी के जेवर, 12 लाख की चारपहिया गाड़ी, फेस मास्क, ग्लब्स, प्लास्टिक पेचकस और इलेक्ट्रॉनिक कटर बरामद हुए हैं।

पुलिस अफसरों की प्रेसवार्ता में सफलता, सुनियोजित कार्रवाई और कठोर अभियान जैसे शब्द खूब चमक रहे थे।

चमकने भी चाहिए!!!!

क्योंकि इस मुल्क में अपराधी जितनी तेजी से राज्य पार कर रहे हैं, उतनी तेजी से कानून की साँस फूलती है।

खैर एक बात और है की इस पूरी कहानी का सबसे खतरनाक किरदार अभी भी पकड़ा नहीं गया और उसका नाम है लापरवाही

हाँ वही लापरवाही, जो रात में पड़ोसी की आवाज़ सुनकर खिड़की बंद कर लेती है।

वही लापरवाही, जो मोहल्ले में संदिग्ध गाड़ी देखकर कहती है हमें क्या?

वही लापरवाही, जो CCTV लगाने के बाद खुद चैन की नींद सो जाती है, जैसे कैमरा नहीं कोई देवता बैठा हो।

“लच्छु गैंग” के ये चार चेहरे जेल चले जाएँगे।

कुछ समय बाद शायद बाहर भी आ जाएँ।

मगर असली सवाल वहीं रहेगा 

क्या इस देश के घर अब ईंट और सीमेंट से नहीं, बल्कि डर और शक से बनेंगे?

और हाँ तुम्हे कसम है गद्दारन की...

अगर अगली बार रात में कहीं ग्रील कटने जैसी आवाज़ आए

तो उसे सपना समझकर करवट मत बदल लेना।

क्योंकि अपराध हमेशा बंदूक चलाकर नहीं आता 

कभीकभी वो सिर्फ *सात मिनट* लेकर आता है।

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