इंदौर की रगों में उतरा “लॉरेंस बिश्नोई गैंग” का स्याह ज़हर! फोन की घंटियों से टपकती थी दहशत, अब गिरफ़्त में आया डिजिटल दरिंदा “नाना” !

इंदौर की रगों में उतरा “लॉरेंस बिश्नोई गैंग” का स्याह ज़हर! फोन की घंटियों से टपकती थी दहशत, अब गिरफ़्त में आया डिजिटल दरिंदा “नाना” !

इंदौर की रगों में उतरा “लॉरेंस बिश्नोई गैंग” का स्याह ज़हर! फोन की घंटियों से टपकती थी दहशत, अब गिरफ़्त में आया डिजिटल दरिंदा “नाना” !

Anam Ibrahim 

Journalist 

7771851163

इंदौर में इंटरनेट के अंधेरों से चल रही थी दहशत की हुकूमत बिश्नोई गैंग का टेक्निकल सूबेदार सलाखों के पीछे!

न बारूद.. न बंदूक.. सिर्फ एक कॉल और शहर में फैल जाती थी दहशत, “बिश्नोई गैंग” का साइबर शिकारी दबोचा गया!

न बंदूक चली! न बारूद फटा!! मगर शहर के कारोबारी हर कॉल पर मौत की आहट सुन रहे थे। मोबाइल, फर्जी नंबर, साइबर जाल और अंडरवर्ल्ड के नाम पर खड़ी की गई खौफ़ की सल्तनत का टेक्निकल जल्लाद उज्जैन से दबोचा गया।

       

        #Jansampark_Life 

          BBC_OF_INDIA 

#Indore/Mp: इंदौर के कारोबारी व्यापारी मालदारो 

मे इन दिनों अंडरवल्ड फिरौती के नाम पर लूट जाने का ख़ौफ़ सर्दी मे हुए कफ़ की तरह ठश गया है 

जी हां वहां काँपती हुई दबी आवाज़े थी ।

बाज़ार भी खुले थे लेकिन यक़ीन बंद था।

मोबाइल बजते थे मगर दिल धड़कना भूल जाते थे।

हर अनजान नंबर, हर व्हाट्सऐप कॉल, हर टूटी हुई आवाज़ के पीछे ऐसा लगता था जैसे अंधेरे में कोई बंदूक भर रहा हो।

और उस अंधेरे के पीछे बार-बार एक ही नाम फुसफुसाया जाता था *लॉरेंस बिश्नोई गैंग*।

क्राइम ब्रांच इंदौर ने अब उस साए का एक और चेहरा बेनकाब किया है!

चेहरा ऐसा, जिसके हाथ में रिवॉल्वर नहीं थी, मगर जिसकी उंगलियां मोबाइल की स्क्रीन पर चलते ही शहर के कारोबारियों की रूह कांप उठती थी।

नाम था *नाना उर्फ रोहित बर्रा*।

उम्र सिर्फ 26 साल।

मगर पुलिस की फाइलों में यह लड़का कोई मामूली किरदार नहीं, बल्कि उस डिजिटल अंडरवर्ल्ड का तकनीकी मुंसिफ बनकर उभरा है, जो इंटरनेट की सुरंगों में बैठकर खौफ़ की तिजारत कर रहा था।

क्राइम ब्रांच की एसआईटी जब पहले से गिरफ्तार आरोपी *राजपाल चंद्रावत* की परतें उधेड़ रही थी, तब पूछताछ के धुंधले धुएं से यह नाम बाहर निकला। इसके बाद साइबर सेल की निगाहें, मुखबिरों की चुगलखोरी से भरी सरगोशियां और तकनीकी ट्रैकिंग का शिकंजा लगातार कसता गया। आखिरकार उज्जैन के महीदपुर से वह चेहरा पकड़ लिया गया, जो कथित तौर पर गैंग के लिए डिजिटल हथियार गढ़ रहा था।

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि धमकी देने वाले नंबरों, कॉलिंग सिस्टम और तकनीकी इंतज़ामों में उसका हाथ था।

वो खुद गोली नहीं चलाता था!

लेकिन हां वो उन आवाज़ों को रास्ता देता था जो फोन पर कहती थीं..

“नाम सुना ही होगा, लॉरेंस बिश्नोई गैंग”

जांच एजेंसियों के मुताबिक यह सिर्फ रंगदारी नहीं थी, बल्कि डर का सुनियोजित कारोबार था। ऐसा कारोबार जिसमें बारूद की जगह डेटा इस्तेमाल हो रहा था और गैंगस्टर की जगह मोबाइल नेटवर्क शहर की गर्दन पर रखा जा रहा था।

पूछताछ में एक और नाम उभरा *सचिन उर्फ वेद प्रकाश शर्मा*। पुलिस का दावा है कि वह भी इसी टेक्निकल गिरोह की कड़ी था। इससे पहले सोनू उर्फ रितेश खंगार और राजपाल चंद्रावत को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। अब जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की तह तक उतर रही हैं।

पुलिस को आरोपी नाना उर्फ रोहित बर्रा का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी मिला है। फाइलें खुल रही हैं, डिजिटल अकाउंट खंगाले जा रहे हैं और हर नई परत के साथ यह मामला किसी गैंगस्टर फिल्म नहीं, बल्कि शहर की नसों में घुस चुकी हक़ीक़त बनता जा रहा है।

थाना अपराध शाखा इंदौर में अपराध क्रमांक 48/2026 और 50/2026 के तहत बीएनएस की धारा 308(5) और 351(4) में मुकदमा दर्ज है। मगर पुलिस महकमे के गलियारों में कानाफूसी कुछ और है 

“यह सिर्फ गिरफ्तारी नहीं

यह उस नए अंडरवर्ल्ड की दस्तक है,

जहां चेहरों से ज्यादा खतरनाक अब मोबाइल नंबर हो चुके हैं”